बरसात में करें ‘रेड ग्लो’ हाइब्रिड पपीते की खेती
नई दिल्ली: बरसात का मौसम पपीते की खेती शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। ऐसे में यदि किसान या बागवानी के शौकीन लोग अधिक उत्पादन देने वाली किस्म की तलाश कर रहे हैं, तो ‘रेड ग्लो’ (Red Glow) हाइब्रिड पपीता एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह उन्नत किस्म कम समय में फल देने, बेहतर स्वाद और अधिक उत्पादन के लिए जानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेड ग्लो हाइब्रिड के पौधे मजबूत होते हैं और इनमें कई सामान्य रोगों के प्रति अच्छी सहनशीलता पाई जाती है। उचित देखभाल और पोषण मिलने पर पौधों में रोपाई के लगभग 8 से 10 महीने बाद फल आना शुरू हो जाता है। एक स्वस्थ पौधे से 80 से 100 किलोग्राम तक फल प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके फल आकर्षक, मीठे और गहरे लाल रंग के गूदे वाले होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
बरसात में क्यों करें रोपाई?
मानसून के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से पौधों की शुरुआती बढ़वार तेज होती है। जुलाई का महीना पपीते की रोपाई के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
खेती के लिए जरूरी बातें
– अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की रेतीली मिट्टी का चयन करें।
– मिट्टी का pH 6 से 7 के बीच होना बेहतर माना जाता है।
– पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि धूप और हवा आसानी से मिल सके।
– समय-समय पर जैविक खाद, सिंचाई और कीट प्रबंधन पर ध्यान दें।
– अनुकूल परिस्थितियों में बीज लगभग 10 से 15 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।
किसानों के लिए लाभदायक विकल्प
रेड ग्लो हाइब्रिड पपीते की किस्म बेहतर गुणवत्ता, अधिक उत्पादन और अच्छी शेल्फ लाइफ के कारण व्यावसायिक खेती के लिए भी लाभदायक मानी जा रही है। यदि वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती की जाए, तो किसान कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।










