मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रि-परिषद की विशेष बैठक में इस संकल्प को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस संकल्प के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास, आर्थिक समृद्धि, जनकल्याण और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया।
विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण पर जोर
मंत्रि-परिषद की विशेष बैठक में वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। संकल्प का उद्देश्य प्रदेश में विकास की गति को तेज करना और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
सरकार का जोर कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास जैसे क्षेत्रों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर है। इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध प्रयासों के जरिए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका
वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दिशा में मध्यप्रदेश की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में कृषि उत्पादन, औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, पर्यटन, ऊर्जा और आधारभूत संरचना के विस्तार के माध्यम से विकास के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
जनकल्याण और समग्र विकास पर रहेगा फोकस
विशेष बैठक में पारित संकल्प प्रदेश के विकास को जनकल्याण से जोड़ने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार हो।
वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का यह संकल्प राज्य के दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश, रोजगार सृजन और नागरिकों की भागीदारी पर विशेष ध्यान देना होगा।










